तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ ।
तू है 900 गुना छोटा इंसा बाल की तुलना में
मचा दी त्रासदी तूने हर इक इंसान की दुनिया में
कराया लॉकडाउन है तूने पूरी ही दुनिया में
तुझे दुनिया का राजा या शैतान कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
तेरी नामोत्पत्ति का ये किस्सा बड़ा अनोखा है
भाषा लातीनी में अर्थ तेरा मुकुट सा होता हैं
तेरे उभरे हुये काँटे मुकुट आकार देता है
तुझे मुकुटनुमा या फिर कोरोना कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
इंसा में श्वास तंत्र का संक्रमण कारण इसके होता
गौ और सूअर में भी कोरोना अतिसार कर सकता
मुर्गी में श्वास तंत्र के रोग ये उत्पन्न कर सकता
तुझे मानव का या वायरस जानवर का कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
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जगत राइबोविरिया तेरा अनिश्चित संघ है तेरा
अधिजगात वायरस तेरा गण विरालीस है तेरा
अल्फा बेटा गामा और डेल्टा वंश है तेरा
तुझे जगत या अधिजगत वायरस मैं कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
तेरा बाप चीन होता वुहान माँ का दर्जा लेता
बनाने वैक्सीन को आर.बी.आई कर्जा देता
अभी उपचार न बनने से चीन गाली जी भर लेता
तुझे वायरस का या हम सब का बाप कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
ये फैले वायु के माध्यम अरू खाँसी से क्षणभर में
ये द्यातक वायरस इतना जो फैले इक पल में
ये मांसाहार प्राणी को संक्रमित करता इक क्षण मे
तुझे जीवाणु बिषाणु या फिर दोनों कहूँ
तुझे वाथरस कॊरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
इक लक्षण वाला तो दूसरा विलक्षण है कोरोना
फर्स्ट मे है थोड़ा रोना दूसरा जिन्दगी खोना
इनके नाम भी है अलग पर खुद में है कोरोना
तुझे नोबल कोरोना या कोविड मैं कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
पहला सिरदर्द है तो दूसरा बुखार और खाँसी
अज्ञात अवधि बहती नाक गले में खराश है आंसी
सांस लेने में कठिनाई लाइलाज है खाँसी
इन्हें लक्षण कोरोना के मैं पूरे कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
हाथों को स्वच्छ रखें न मुंह और नाक छुये
जिनको हुआ था कोरोना क्वारन्टीन वे हुये
हाथों से करें नमस्ते अनविज्ञ वस्तु न छुये
इन्हे ही रोकथाम के उपाय में कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
करो कर्फ्यू समर्थन का लॉकडाउन का भी पालन
दो सहयोग तुम अपना करने गरीबों का लालन
ध्यान रखकर कोरोना का करो सोशल दूरी तुम पालन
इसे ही मैं "सृष्टि" की कविता का सार कहूँ
तुझे वायरस कोरोना कहूँ या फिर मंजर मौत का कहूँ।।
कु० सृष्टि जैन
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