विज्ञापन

फिर वक़्त चलेगा, यादें धुंधली होंगी

EKTA TYAGI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जिस दिन हम इस दुनिया से जाएँगे,
        
                                                    
                            
सूरज फिर भी वैसे ही मुस्काएगा,
बाज़ार सजेंगे, सड़के चलेंगी,
ये संसार कहाँ हमारे लिए रुक पाएगा।

कुछ आँखें नम होंगी, कुछ दिल उदास होंगे,
कुछ अपनों के होंठों पर हमारे एहसास होंगे,
कोई तस्वीर देखकर इतना ही कह जाएगा—
इंसान बहुत अच्छा था… हमेशा याद आएगा।

फिर वक़्त चलेगा, यादें धुंधली होंगी,
हमारी बातें भी धीरे-धीरे कम होंगी,
जिन चीज़ों को हमने अपना समझकर सँभाला,
कल उन्हीं पर किसी और का हक़ होगा।

जिस नाम को बनाने में उम्र गुज़ार दी,
जिस पहचान के लिए हर खुशी वार दी,
एक दिन वही नाम किसी तस्वीर के नीचे होगा,
और अपना करा सब कुछ किसी और का होगा।

तो फिर घमंड कैसा, नाराज़गी कैसी?
ये दौड़ कैसी और ये बेचैनी कैसी?
जब एक दिन खाली हाथ ही जाना है,
तो क्यों न जीते-जी ये जीवन जी जाना है।

कुछ रिश्ते सँवार जाएँ, कुछ दिल जीत जाएँ,
किसी के चेहरे पर मुस्कान बन जाएँ,
क्योंकि एक दिन सब यहीं रह जाएगा…
बस हमारे कर्म और यादें साथ रह जाएँगी।
— ओमेन्द्र त्यागी महादेवपुरम
10 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

User

26 कविताएं

View Profile

Updesh Kumar

12570 कविताएं

View Profile

Sudhir Khatri

562 कविताएं

View Profile