विज्ञापन

काश तू मेरी गली से गुज़रे

Durgesh Tiwari

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            काश तू मेरी गली से गुज़रे,
        
                                                    
                            
‎फिर से तेरा दीदार करूं ।
‎उस नुक्कड़ पर जब भी आए,
‎छत से इशारे हज़ार करूं ।
‎काश तू मेरी गली से गुज़रे ।
‎
‎मुस्कुराके तू देखे मुझको,
‎आंखों से तुझपे वार करूं ।
‎जो ना दिखूं मैं इक पल तो,
‎वापस मुड़ने को बेकरार करूं ।
‎काश तू मेरी गली से गुज़रे ।
‎
‎हाथ पकड़कर चले तू मेरा,
‎बीते पलों को फिर से याद करूं ।
‎बेफिकर रहूं ज़माने से और,
‎प्यार भी सरे बाज़ार करूं ।
‎काश तू मेरी गली से गुज़रे ।
‎
‎कभी प्यार तो कभी शरारत,
‎हद को भी अपनी पार करूं ।
‎होली आए तो तेरे गालों को,
‎चुपके से फिर रंग लाल करूं ।
‎ख़ैर.......
‎झूठे सपने संजोनें से मैं,
‎खुद को कैसे इनकार करूं ।
‎इक बार सही पर तू ही बता !
‎कब तक तेरी राह निहारूं,
‎कब तक तेरा इंतज़ार करूं ।
‎काश तू मेरी गली से गुज़रे,
‎फिर से तेरा दीदार करूं ।
‎-‎डी के तिवारी 
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

samarth dalela

2 कविताएं

View Profile