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होसलों से अधिक तेज़ कोई हथियार न

DTS Bhartiya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            चल उठ जाग, आगे बढ़
        
                                                    
                            
अपनी कहानी का सिकंदर भी तू है और सैलाब भी

अपने अंदर झांक कर देख ,
परिंदे से ज्यादा उड़ान तेरी है,
तू कर तो सही , थोड़ा थोड़ा चल तो सही,
आगे बढ़ तो सही,
ठोकरों को गले लगा, मुसीबतों से प्यार कर,
तन्हाइयों का इंतज़ार कर ,

हर दर्द के बाद एक नई कहनी का उदय होगा,
तू रुकना मत , चलते रहना, आगे बढ़ते रहना,

तुम्हारी जीत की आस में,
तुम्हारी खुशियों की तलास में,
बैठे है तुम्हारे अपने, तुम्हारे इंतज़ार में,

तू आस बन किसी के दर्द में काम आ,
दिल लगा सभी को महफूज कर,
जो बने दिल से नेक काम कर।

अब न तू आराम कर ,
चल उठ पढ़, अधूरे ख़्वाब पूर्ण कर ,
आलस्य पे बार कर,
तेज़ कर गति उठ जाग ,
अंधकार को दूर कर
देख अपने अतीत को,इसका तू सुधार कर ,

तू देश फर्ज़ , दीन दुखी वास्ते नेक काम कर ,

होसलों से अधिक तेज़ कोई हथियार न,
चल उठ, आगे आ,
सबसे कुशाग्र बन ,सबसे तीक्ष्ण बन
चल उठ जाग आगे बढ़,,
2 घंटे पहले
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Adv DK Kanojiya

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