दो हजार इक्कीस का, सूर्य हो गया अस्त।
स्वागत में नववर्ष के, प्रतिमन दिखता व्यस्त।।
आशाओं के दीप जलाकर, साल गया है बीत।
दो हजार बाइस से, अब हमको उम्मीद।।
ओमिक्रोन का वायरस, नहीं करे बेहाल।
कॅरोना से जन-जन का, हो चुका बुरा है हाल।।
आपस में सद्भावना, बढ़े जगत में प्रीति।
भारत की यह संस्कृति, यही हमारी रीति।।
आओ लें संकल्प यह, रखेंगे इसका ध्यान।
नए वर्ष में हर प्राणी का, करेंगे हम सम्मान।।
नए साल के सूर्य का, होते ही उत्कर्ष।
चाहत इस 'योगेंद्र' की, प्रतिमन छाए हर्ष।।
नए साल में सभी को, खुशियाँ मिलें अपार।
आत्मीय उत्साह हो, बढ़े सभी में प्यार।।
-डॉ0 योगेंद्र वी0 एस0 तिवारी 'तनय'
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