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कहाँ छिपे बजरंगी

DrPradeep Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            " कहाँ छिपे बजरंगी " (भक्ति गीत)
        
                                                    
                            
कहाँ छिपे बजरंगी, कहाँ ध्यान लगा रहे,
टूट रहा है धीरज मेरा, क्यों नज़र नहीआ रहे।।
आओ मेरे बजरंगी, आओ केसरी नंदन,
डूब रही है नैया मेरी, अब क्यो देर लगा रहे।
चारों ओर अँधेरा मेरे, मन मेरा घबराए,
दुनिया में कोई अपना, नजर नहीं अब आए।
आँखों में हैं आँसू मेरे, किसको हाल सुनाऊँ,
संकटमोचन आ जाओ अब, तेरे द्वार मैं आऊँ।
कहाँ छिपे बजरंगी, कहाँ ध्यान लगा रहे,
टूट रहा है धीरज मेरा, क्यों नज़र नहीआ रहे।
धन-दौलत की चाह नहीं ,मन को सुख दे देना,
टूटा रहा दिल मेरा जो,उसको राहत दे देना।
मान-मर्यादा रख लेना , लाज मेरी बचाना,
राम नाम की ज्योत जलाके, राह मुझे दिखलाना।
कहाँ छिपे बजरंगी, कहाँ ध्यान लगा रहे,
डूब रही है नैया मेरी, क्यों अब देर लगा रहे।
सीता मैया को ढूँढा, राम जी के दुख हर लाए,
राम-सिया का मिलन कराके, प्रभु के मन को भाए।
वैसे ही मेरे मन को, रामसिया से आज मिला दो,
भटकी हुई मेरी नैया को, प्रभु के घाट लगा दो।
कहाँ छिपे बजरंगी, कहाँ ध्यान लगा रहे,
टूट रहा है धीरज मेरा, क्यों नज़र नही आ रहे।
जब-जब मन घबराए मेरा, नाम तेरा मैं गाऊँ,
दुनिया चाहे साथ न दे, तेरा साथ निभाऊँ।
तू ही मेरा सच्चा साथी, तू ही एकमात्र सहारा,
राम नाम की शरण में कर दो, जीवन में भर दो उजियारा।
माया-मोह में मत उलझाओ, राम नाम बिसराया,
थोड़ी सी कृपा कर दो प्रभु, मन में राम बसाया।
सीता-राम के चरणों तक, मुझको आज पहुँचा दो,
हे बजरंगी मेरे स्वामी, अपना हाथ बढ़ा दो।
राम नाम मुख पर हो मेरे, मन का डर मिट जाए,
बजरंगी की कृपा होए जब, हर संकट कट जाए।
सीता-राम सदा हों दिल में, इतनी मेरी आस,
हे हनुमंत कृपा कर देना, रखना मेरी लाज।
कहाँ छिपे बजरंगी, कहाँ ध्यान लगा रहे,
टूट रहा है धीरज मेरा, क्यों नज़र नहीं अब आ रहे।
-प्रदीप बाबू
 
2 घंटे पहले
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