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दूसरों की कद्र कर भी जीवन का आनंद ले सकते हैं।

Dr. Srk

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            विडंबनाओं में भी सामान्य ढूंढते हैं
        
                                                    
                            

अजीब विडंबना है
प्रति वर्ष गाड़ियां बेतहाशा बढ़ती दर में बिकनी चाहिए
परंतु सड़क पर धुआं न्यूनतम होनी चाहिए
और किसान अनाज अधिकत्म उपजाए
किंतु खेतों में ठूंठ न जलाये।

फिर भी अगर मै चाहूँ तथा तुम चाहो
तो पेड़ों के बीच से राहें निकल सकती है
नदियों की राह न रोक कर घर बसाया जा सकता है
कुछ धीमे सफर करके भी मंजिल तक पहुंच सकते हैं
कुछ कम जुटा कके भी खुश रह सकते हैं।

अजीब विडंबना है,
पहाड़ तोड़कर बिजली घर निर्माण होनी चाहिए
परंतु पर्यटन के लिए पहाड़ चाहिए
घर बैठे वस्तुएं समय पर सुरक्षित चाहिए
परंतु आस पास कचड़े की ढेर नहीं होनी चाहिए।

फिर भी अगर मै चाहूँ तथा तुम चाहो
कुछ सैर कर कुछ चल कर
कुछ हँस कर कुछ बातचीत कर
जब आवश्यक हो वस्तुएं लाई जा सकती हैं
पेकेज की कई परतें बचाई जा सकती हैं।

अजीब विडंबना है,
हजारों चिमनियों से धुआं उठे तो प्रगति है
परंतु स्वच्छ, शुद्ध साँस की गांव अवगति है
आसमान को छूती मंज़िले उन्नति हैं
परंतु हर मोड़ पर रुकती ट्रैफिक दुर्गति है।

फिर भी अगर मै चाहूँ तथा तुम चाहो
शहर की बची हुई हृदय को कालिख से बचा सकते हैं
बची पेड़, बची नहर, बची पंड, बचे पंछी को सम्भल सकते हैं
सुबह की सैर, शाम की जमघट को जारी रख सकते हैं
कभी पैदल, कभी साइकिल, पर आ जा सकते हैं।

विडम्बनाएं हैं अजीब, अनेक
फिर भी अगर मै चाहूँ तथा तुम चाहो
कुछ कम रख कर अन्य बांट कर जी सकते हैं
कुछ कहकर, कुछ सुनकर भी चर्चा कर सकते हैं
नफरत के बिना भी स्वधर्म निभा सकते हैं
दूसरों की कद्र कर भी जीवन का आनंद ले सकते हैं।
12 घंटे पहले
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