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मेरी माटी मेरा देश

dk Shalini

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस पावन,माटी पर कितने,
        
                                                    
                            
लुटा गए हैं प्राण ,,
कर डाले हैं हम, लोगों पर
बहुत बड़ा एहसान,,
आज दे रहे,इस आंगन से,
उनका यह संदेश,,,
मेरी माटी, मेरा देश,
मेरी माटी ,मेरा देश 

इतिहासों में, मिटा दिया था,
उनको वापस लाएंगे,
काश्मीर के इस जन्नत में,
जन-गण ,मंगल जाएंगे,,
कभी रक्त से ,लाल हुई थी,
मेरे देश की यह माटी,,
तुम्हें सुनाऊ, रही है हरदम,
वीर देश की परिपाटी,,
मैं बदलूंगा, तुम बदलोगे,
बदलेगा परिवेश,,,
मेरी माटी,मेरा देश,(2)

भारत की इस,पुण्य भूमि को,,
सब मिल, शीश झुकाते हैं,,
हर, गांव की, मिट्टी लेकर,
दिव्य कलश, में मिलाते हैं,,
इस मिट्टी में,भस्म मिला है,
इसका,तिलक लगाएंगे,,
इसको स्वर्ण,कलश में रखकर,
राजधानी ले जाएंगे,,
वीरों की ये हस्ती है ये
उनका है अवशेष,,
मेरी माटी, मेरा देश ,,,

कहीं सेब के, बाग बगीचे,
केसर,कहीं पे, लहराए,
कहीं बर्फ की,चादर ओढ़े,
उच्च शिखर भी शर्माए,,
कहीं शैल उर,चीर के निकले,
देखो शीतल जल धारा,,
मन निर्मल हो,मन गर्वित हो,
आश्चर्य चकित,हो जग सारा,,
अब कोई, झगड़ा ना होगा,
मिटेंगे सारे क्लेश,,
मेरी माटी, मेरा देश,
मेरी माटी मेरा देश
मेरी माटी, मेरा देश,
-दीपेंद्र तिवारी 
5 घंटे पहले
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