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तुम बढ़े चलो

Diwakar Ojha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रूको नहीं,झुको नहीं, चले चलो।
        
                                                    
                            
बीर तुम बढ़े चलो।।

आग की लपट यहां।
इंसान की कपट यहां।।

रहम की जगह नहीं
बेरहम बने चलो।
बीर तुम बढ़े चलो।।

धैर्य पास हो तेरे।
मीत खास हो तेरे।।

राग-अनुराग हो सखा
जय हिन्द कहे चलो।
बीर तुम बढ़े चलो।।

हस्त कृपाण कटार हो।
तिलक भाल सकार हो।।

लक्ष्य पर निगाह सदा
धरा धीर बने चलो।
बीर तुम बढ़े चलो।।

*दिवाकर ओझा"विधुबिहारी"


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