विज्ञापन

मुजफ्फरपुर

Dinesh Yadav

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुजफ्फरपुर में मचा हुआ हाहाकार है
        
                                                    
                            
संसद में गूंज रही नारों की जयकार है
कलंकित हो रहा है आज लोकतंत्र हमारा
और मानवता हो रही यहां शर्मसार है।

चुनाव में बड़े-बडे़ सपने दिखाते हैं
हर समस्या का समाधान बताते हैं
आज अस्पतालों में फैला है खौफनाक मंजर
फिर भी सरकार मौन और लाचार है।

मंत्री आज तरह-तरह के बहाने बनाते हैं
अपने वादों से जनता का ध्यान भटकाते हैं
मौत के नये बेतुके बयान देकर वह बच्चों
पर क्यूं कर रहे नित नये अत्याचार हैं?

मंत्री सिर्फ दौरा कर के चले जाते हैं
अफसरों को कुछ हिदायतें दे जाते हैं
क्यूं क्रिकेट के स्कोर में आज दबायी
जा रही बच्चों की मौत की चीत्कार है।

नन्हें-नन्हें गुड्डे और गुड़ियां की सांसें उखड़ रही हैं
रोज यहां पर मांओं की गोंदें उजड़ रही हैं
मौन पड़ी सरकार आज है और अस्पतालों में
फैला हुआ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है।

कभी आक्सीजन के लिए दम तोड़ा
कभी रहस्यमयी बिमारियों ने घेरा
सरकार छुपाती रहती अपनी कमियों को
बच्चों के लिए मुश्किलों भरा आज यह संसार है।


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Chaturvedi

181 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10278 कविताएं

View Profile