आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मुजफ्फरपुर

                
                                                         
                            मुजफ्फरपुर में मचा हुआ हाहाकार है
                                                                 
                            
संसद में गूंज रही नारों की जयकार है
कलंकित हो रहा है आज लोकतंत्र हमारा
और मानवता हो रही यहां शर्मसार है।

चुनाव में बड़े-बडे़ सपने दिखाते हैं
हर समस्या का समाधान बताते हैं
आज अस्पतालों में फैला है खौफनाक मंजर
फिर भी सरकार मौन और लाचार है।

मंत्री आज तरह-तरह के बहाने बनाते हैं
अपने वादों से जनता का ध्यान भटकाते हैं
मौत के नये बेतुके बयान देकर वह बच्चों
पर क्यूं कर रहे नित नये अत्याचार हैं?

मंत्री सिर्फ दौरा कर के चले जाते हैं
अफसरों को कुछ हिदायतें दे जाते हैं
क्यूं क्रिकेट के स्कोर में आज दबायी
जा रही बच्चों की मौत की चीत्कार है।

नन्हें-नन्हें गुड्डे और गुड़ियां की सांसें उखड़ रही हैं
रोज यहां पर मांओं की गोंदें उजड़ रही हैं
मौन पड़ी सरकार आज है और अस्पतालों में
फैला हुआ भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है।

कभी आक्सीजन के लिए दम तोड़ा
कभी रहस्यमयी बिमारियों ने घेरा
सरकार छुपाती रहती अपनी कमियों को
बच्चों के लिए मुश्किलों भरा आज यह संसार है।


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर