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तेरे आने का बस धोखा

dinesh chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बिजली बादल बरसातें
        
                                                    
                            
बिन तेरे डसती ये राते .

पुरवाई का हर झोंका
तेरे आने का बस धोखा.

चमकी बिजली जोर से
नींदे उड़ जातीं शोर से.

हर दम देती झिड़की
रह रहकर ये खिड़की.

नभ में नीरद माला
रंग बदली का काला.

मेघ भी दूत नहीं बनते
पर्वत पीड़ा के जब फटते .

- दिनेश चौहान
17 घंटे पहले
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