गुनगुनी धूप संग कनेर के साये में
हाथों के साथ तेरे गर्माहट लाएंगे .
झोंके हवाओं के पूरब से आ करके
स्मृतियों के बादल आँचल में छायेगे.
डुबाने को प्रेम में पत्तों के झुरमुट से
प्रवासी खग आने की आहट को पाएंगे .
सूरज की किरणों संग मधुपों के अंगअंग
फिर नए प्रसंग और कथानक दोहराएंगे.
जाड़े के मौसम में गरमाहट की आहट
व्याकुल कर मन को पास पास लाएंगे.
-दिनेश चौहान