कल तक तकदीर लिखा करते थे वो आज फर्श पर बैठे हैं
कुछ लोग कंगूरे पर चढ़ जा बैठे जो बोझा खींचा करते थे.
ये वक़्त बदलता रहता है ऊपर नीचे सब होता रहता है
फसलों की उपजों के खातिर ऊसर भी सींचा करते हैं.
-दिनेश चौहान