कलम से मुहब्बत पुरानी लिखूँगा ।
बुढ़ापे में तेरी जवानी लिखूँगा ।।
नम-नम हुई है जो आँखे ये मेरी ।
ना समझे इसे तो मैं पानी लिखूँगा।।
खत्म कहाँ है जिस्मों पे मेरी ।
मोहब्बत तुमसे रूहानी लिखूँगा ।।
नजर आए सबको तू बातों में मेरी।
मैं लफ्जों से ऐसी कहानी लिखूँगा ।।
खत्म होती कहाँ खत्म होने से मेरे ।
अमर ये तुम्हारी निशानी लिखूँगा ।।
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