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कलम से मोहब्बत पुरानी लिखूँगा...

DILIP TRIPATHI

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                            कलम से मुहब्बत पुरानी लिखूँगा ।
        
                                                    
                            
बुढ़ापे में तेरी जवानी लिखूँगा ।।

नम-नम हुई है जो आँखे ये मेरी ।
ना समझे इसे तो मैं पानी लिखूँगा।।

खत्म कहाँ है जिस्मों पे मेरी ।
मोहब्बत तुमसे रूहानी लिखूँगा ।।

नजर आए सबको तू बातों में मेरी।
मैं लफ्जों से ऐसी कहानी लिखूँगा ।।

खत्म होती कहाँ खत्म होने से मेरे ।
अमर ये तुम्हारी निशानी लिखूँगा ।।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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