विज्ञापन

माँ जैसा कोई नहीं

DifferentShades of

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक तू ही है जो, मुझको आज भी पढ़ लेती है।
        
                                                    
                            
मेरे बिना कहे, सब आज भी समझ लेती है |

हर तकलीफ में मेरी, तेरी नींद कहीं खो जाती है ।
मेरी एक मुस्कान से, तेरी सुबह हो जाती है ।

अपने से ज्यादा आज भी, तुझे मेरी फिक्र होती है |
बिना लिए खैरियत मेरी, तू आज भी कहाँ सोती है |

एक तू ही है जो मुझको......................

कितनी बातें, तुम पापा को बताती हो |
हमारी सिफारिश तुम आगे बढ़ाती हो |

जायज़ नाज़ायज, हर फरमाइश तुमसे हमने हैं मनवाई |
तूने भी अपनी ममता बेशुमार है लुटाई |

आज तुझसे दूर सही, पर तू मुझसे कब दूर है ।
माँ का आशीष कब किस बच्चे से दूर है |

एक तू ही है जो मुझको......................

माँ तेरी आवाज का जादू, आज भी यों कायम है |
बेचैन मन को मेरे देता तुरंत सुकून है |

माँ तू तो अपने में पूरी क़ायनात है |
तेरा बजूद ही हर बच्चे के लिए वरदान है |

एक तू ही है जो, मुझको आज भी पढ़ लेती है।
मेरे बिना कहे, सब आज भी समझ लेती है |


(लेखक - धीरेन्द्र सिंह)


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rabindra Aman

118 कविताएं

View Profile