धरती अंबर गूँज रहा है, राष्ट्रभक्ति की तानों से,
सजा हुआ है भारत अपना, वीर सपूतों की शानों से।
अखंड रूप जो देख रहे हम, आज सुनहरे भारत का,
ऋणी रहेगा देश हमेशा, उस फौलादी ताकत का।
बिखरी हुई रियासत को जो, एक सूत्र में बांध गया,
वह नाडियाड का वीर पुरुष था, जो हर संकट लांघ गया।
झुका दिया था पल भर में हर अभिमानी नृप-तेवर को।
नक्शा बदला इस माटी का, एक नया इतिहास रचा,
उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति से, दुश्मन का न कोई दांव बचा।
जूनागढ़ हो या हैदराबाद, सबको भारत में मिलाया था,
सच्चे राष्ट्रभक्त का क्या है धर्म, दुनिया को यह सिखाया था।
उत्तर-दक्षिण, पूर्व-पश्चिम, गूंज रहा एक ही नारा है,
विविधता में एकता ही, गौरव और श्रृंगार हमारा है।
बारडोली के सत्याग्रह में, गूंजे जिसके नारे थे।
भेदभाव की दीवारें ढहाकर, समरसता का पाठ दिया,
'एक राष्ट्र और श्रेष्ठ राष्ट्र' का, जिसने सुंदर मंत्र उचारा।
एकता दिवस का यह पावन दिन, याद दिलाता उस लौह पुरुष का,
जिसने बदली थी तकदीरें, अपने प्रिय भारत की।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक, गूँज रही एक ही पुकार,
अखंड रहेगा भारत अपना, अटूट है हमारा प्यार।
राष्ट्रीय एकता दिवस है, ये प्रण दोहराने का ,
हम भारत के लोग एक थे, एक हैं, एक रहेंगे ।
-देवेंद्र मणि पाण्डेय