देखो ध्यान से दुनिया को,
हिन्दी कैसे भा रही है,
हर देश, हर महाद्वीप में,
मशाल अपनी जला रही है।
मॉरीशस में वो गीत बनी,
फिजी में संगीत बनी,
सूरीनाम में रीत बनी।
रूसी अब हिंदी अपनाते,
अमेरिका में हिन्दी गाते,
जर्मनी में गीता पढ़ते।
सिलिकॉन वैली में हिन्दी है,
गूगल के कोड में हिन्दी है,
नासा के शोध में हिन्दी है।
तुलसी, सूर, कबीर,रहीम,
हिन्दी में ही ज्ञान दिए,
हिन्दी , गीता का ज्ञान कराए,
योग और ज्ञान का दीप जलाए।
विश्व ने देख लिया है,
अंग्रेजी में अहंकार है,
हिन्दी में संस्कार है,
अंग्रेजी में बाजार है,
हिन्दी में परिवार है।
हिन्दी "सर्वे भवन्तु सुखिनः" है,
हिंदी"वसुधैव कुटुम्बकम् "है।
विश्व जब भटक रहा है,
भौतिकता में जल रहा है,
शांति चाहिए तो भारत आओ,
हिन्दुस्तान की हिंदी अपनाओ।
विश्व को युद्ध ,नहीं बुद्ध चाहिए,
बम नहीं ,प्रेम चाहिए,
प्रेम की भाषा , हिन्दी है, हिन्दी है।
-देवेंद्र मणि पाण्डेय