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कदम-कदम पर कारवाँ बनता है

Devaki Nandan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कदम-कदम पर कारवाँ बनता है,
        
                                                    
                            
हौसले से ही रास्ता बनता है।

अकेले ही तो निकलना पड़ता है,
फिर देखो, काफिला खुद जुड़ता है।

मत हँसो उस पर, जो आज अकेला खड़ा है,
आज जो सड़कों पर धक्के खा रहा है,
कल वही दुनिया को रस्ता दिखा सकता है।

हर कदम एक नई सीख देता है,
गिर के ही इंसान चलना सीखता है।

आज जो खामोश है, कल उसकी भी कहानी होगी,
आज जिसे ठुकराया, कल उसकी भी निशानी होगी।

मंज़िल दूर सही, पर जाना जरूर है,
रुक गए तो समझो, हारना जरूर है।

इसलिए चलते रहो, बढ़ते रहो,
अकड़ छोड़ो, ज़मीन से जुड़े रहो,

क्योंकि कदम-कदम पर कारवाँ बनता है,
और हर किसी का दिन जरूर आता है।

कदम-कदम पर कारवाँ बनता है,
बस चलते रहो।
-देवकी नन्दन
एक घंटा पहले
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