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कदम-कदम पर कारवाँ बनता है

                
                                                         
                            कदम-कदम पर कारवाँ बनता है,
                                                                 
                            
हौसले से ही रास्ता बनता है।

अकेले ही तो निकलना पड़ता है,
फिर देखो, काफिला खुद जुड़ता है।

मत हँसो उस पर, जो आज अकेला खड़ा है,
आज जो सड़कों पर धक्के खा रहा है,
कल वही दुनिया को रस्ता दिखा सकता है।

हर कदम एक नई सीख देता है,
गिर के ही इंसान चलना सीखता है।

आज जो खामोश है, कल उसकी भी कहानी होगी,
आज जिसे ठुकराया, कल उसकी भी निशानी होगी।

मंज़िल दूर सही, पर जाना जरूर है,
रुक गए तो समझो, हारना जरूर है।

इसलिए चलते रहो, बढ़ते रहो,
अकड़ छोड़ो, ज़मीन से जुड़े रहो,

क्योंकि कदम-कदम पर कारवाँ बनता है,
और हर किसी का दिन जरूर आता है।

कदम-कदम पर कारवाँ बनता है,
बस चलते रहो।
-देवकी नन्दन
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
43 minutes ago

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