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शाम को वो बस में घर लौटती है

Dev Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            औरतें अब भी समय से पहले बड़ी हो जाती हैं,
        
                                                    
                            
भाइयों के बाद, थोड़ा कम खाना खा लेती हैं।

स्कूल में फर्स्ट आई तो सबने ताली बजाई,
फिर कहा - अब घर संभालो, बहुत पढ़ाई हो गई।

दफ्तर में उसकी कुर्सी तो है,
पर उसकी बात के लिए जगह नहीं है।

शाम को वो बस में घर लौटती है,
एक हाथ में बैग, एक हाथ में खुद की इज्जत संभालती है।

वो थकती नहीं है, ऐसा हम मान लेते हैं,
वो रोती नहीं है, ऐसा हम समझ लेते हैं।
-देव कुमार पटेल
2 घंटे पहले
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