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नजरें चुरा लूंगी मैं

dev chauhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो मिलेंगे तो नजरें चुरा लूंगी मैं।
        
                                                    
                            
मुँह छुपा धीरे से मुस्कुरा लूंगी मैं।

दिल कराहेगा उनके लिए जो मेरा,
तो चुपके से उसको चुपा लूंगी मैं।

मेरी धड़कन की आहट वो सुन न लें,
अपने हाथों से सीना दबा लूंगी मैं।

वो पुकारें मुझे तो नहीं जाऊँगी,
फिर इशारे से उनको बुला लूंगी मैं।

अगर बोले,"क्या तुम खफा हो गये हो?, "
तो "ना" कहके नजरें मिला लूंगी मैं।

वो अगर पूछ बैठे,"रूठी हो क्यों? ",
सारे इल्जाम खुद पे लगा लूंगी मैं।

रूठ बैठे अगर वो किसी बात पर,
उन्हें मासूमियत से मना लूंगी मैं।

मेरी बाँहे पकड़ कुछ वो कहने लगे,
उन्हें सीने से अपने लगा लूंगी मैं।

वो शरम से अगर दूर जाने लगे,
उनको जुल्फों में अपनी छुपा लूंगी मैं।
-देवेन्द्र सिंह चौहान
एक घंटा पहले
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