तुझे एक पल को भी, कैसे भुलाऊँ मैं।
तू दिल पे उकेरी है, कैसे मिटाऊँ मैं । ।
तेरे दम से मेरा दम,तू मेरी रूह की जीनत है,
खुद अपनी ही अर्थी को, कैसे सजाऊँ मैं। तू दिल,,,
न रुसवाई हो जाये, दर्द छुपा लेता हूँ।
अश्क नादां बहते हैं, कैसे छुपाऊँ मैं। तू दिल,,,
मै सदके तेर सीरत पे,मासूमियत पे वारी हूँ,
तू मलिका है बहारों की, क्यों न रिझाऊँ मैं। तू दिल,,,
देखूँ तो दिल मचले, न देखूँ तो रोता है,
खुद ही गम के मारे को,कैसे रुलाऊँ मैं। तू दिल,,,,
तू खयालों से फिसले तो,संँवरती है ख्वाबों में,
मेरी नहीं सुनता दिल, कैसे मनाऊं मैं। तू दिल,,,,
एक तू ही तो मेरी है, बाकी रिस्ते नाते हैं,
बता दर्द ए दिल अपना,किसको सुनाऊँ मै। तू दिल,,,
नहीं दिल पे जोर मेरा है, जब से तुम समाये हो,
ये पल पल कराहता है, कैसे चैन पाऊँ मैं। तू दिल,,,,
तुझे एक पल को भी, कैसे भुलाऊँ मैं।
तू दिल पे उकेरी है, कैसे मिटाऊँ मैं।
कैसे भुलाऊँ मैं
कैसे भुलाऊँ मैं
-देवेन्द्र सिंह चौहान