विज्ञापन

देखो उड़ी पतंग

मेराज रजा

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            देखो-देखो उड़ी पतंग,
        
                                                    
                            
आसमान में लड़ी पतंग।

नीली-पीली, काली-लाल,
सब हैं अनूठी, बेमिसाल।

गजब है इनका रंग-रूप,
उड़ती-मचलती छांव-धूप।

पूंछ बांध उड़ जाती दूर,
ढील देना लेकिन जरूर।

उत्सव की है खूब बहार,
मुझे है पतंगों से प्यार।

- मेराज रज़ा

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Shivam Awasthi

3 कविताएं

View Profile