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मोम का इश्क़

DEEPAK PRAJAPATI

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इश्क में लड़कों को ही अब मोम होना पड़ता है,
        
                                                    
                            
हँस के महफ़िल में अकेले में ही रोना पड़ता है। 

जो थे लापरवाह बेहद अपनी धुन के पक्के थे,
तोड़ के अपनी ही ज़िद को उनको रहना पड़ता है।

अपनी ज़िद अपनी अना, था जो लड़कपन अपना पर,
इश्क़ की ख़ातिर ही वो सब हमको खोना पड़ता है। 

रहते थे हर दम अकड़कर जो बहारों की तरह,
ख़ाक में मिलकर उन्हें अब नर्म होना पड़ता है।

जो परिंदे उड़ते थे आज़ाद हो अफलाक में,
ओट में पत्तों की छुप कर उनको रोना पड़ता है। 
– दीपक 'अलक' 
एक महीने पहले
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