विज्ञापन

इश्क

Deepak Dixit

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये इश्क क्या हुआ, नज़रें बदल गयी
        
                                                    
                            
आँखों के सामने का नज़ारा बदल गया

गिनती वही रही, पोथी वही रही
सारा हिसाब किताब हमारा बदल गया

हमने तो कोई बात अभी की ही न थी
क्यों एकदम मिज़ाज़ तुम्हारा बदल गया ?

हरकत वही रही तेरे जिस्म की मगर
ऐसा नशा चढ़ा कि इशारा बदल गया

दुनिया वही रही, मौसम वही रहे
ये दिल जो है इस गरीब का सारा बदल गया

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
6 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all