विज्ञापन

वो स्त्री है

Deep Advices

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वो पानी की तरह है;
        
                                                    
                            
जो कठोर पत्थरों पर भी धारा बनकर बहती है।
हर एक मोड़ से निकलती है,
बहुत से रूप बदल कर।
कहीं साफ तो कहीं मैली,
कहीं नरम तो कहीं उफनति हुई।

पहाड़ों को चीर; संघर्ष करती हुई,
मैदानों के बीच से गुजरती है।
बस एक अस्तित्व की चाह में,
बहती चली जाती है,
और मिल जाती है किसी सागर से।
वो एक स्त्री है
जो दुर्गम राह से भी,
धारा बनकर बह जाती हैं।
अस्तित्व त्याग कर भी;
निस्वार्थ समर्पण सीखा जाती है।
2 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

kamal jha

90 कविताएं

View Profile