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पाना ईश्वर को कुछ बातों से।

Davinder Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हवा का गला घोट कर,
        
                                                    
                            
पानी को प्यासा मार कर,
मानवता सपना देख रही,
गले में फंदा डालकर।

चीर कर सीना धरती का,
घोला उसमें रस विष का,
मानवता सपना देख रही,
एक निर्जीव धरती का।

कल पुर्जो को जोड़ कर,
कुदरत के नियम तोड़कर,
मानवता सपना देख रही,
जीने का, धरती छोड़ कर।

बाँट कर धरती को लकीरों से,
लड़ती विनाशक हथियारों से,
मानवता सपना देख रही,
पाना ईश्वर को कुछ बातों से।
2 घंटे पहले
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