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पाना ईश्वर को कुछ बातों से।

                
                                                         
                            हवा का गला घोट कर,
                                                                 
                            
पानी को प्यासा मार कर,
मानवता सपना देख रही,
गले में फंदा डालकर।

चीर कर सीना धरती का,
घोला उसमें रस विष का,
मानवता सपना देख रही,
एक निर्जीव धरती का।

कल पुर्जो को जोड़ कर,
कुदरत के नियम तोड़कर,
मानवता सपना देख रही,
जीने का, धरती छोड़ कर।

बाँट कर धरती को लकीरों से,
लड़ती विनाशक हथियारों से,
मानवता सपना देख रही,
पाना ईश्वर को कुछ बातों से।
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एक घंटा पहले

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