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ज़िन्दगी गुलज़ार हैं..

Charoo Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िन्दगी गुलज़ार हैं और
        
                                                    
                            
मैं उसका गीत हूं....

ज़िन्दगी नायाब हैं और
मैं उसका शबाब हूं...

ज़िन्दगी प्रीत है और
में उसकी रीत हूं....

ज़िन्दगी कभी - कभी तन्हा है और
मैं उसकी तन्हाई हूं....

ज़िन्दगी बरखा है और
मैं उसकी बहार हूं...

ज़िन्दगी तुझसे कायम है और
मैं उसकी कामयाबी हूं...

ज़िन्दगी रुत है और
मैं उसकी जीत हूं...।।

- चारू शर्मा

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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6 वर्ष पहले
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