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अन्यथा तू छोड़ दे , अन्यथा तू छोड़ दे।

Chandra Pratap

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस उजाले आसमां को,
        
                                                    
                            
देख कर और मस्कुराकर।
चल दिए हम खेलते हुए,
ऊँचाइयों पर इस कदर।
मानो पा ही जाएंगे यूं सहजता से इन्हें ,
पड़े मिल रहे हों जैसे सामने सड़क पर।
फिर पता चला कि आसान नहीं ये रास्ते,
करनी पड़ेगी खुशियां निछावर अब किताबों के वास्ते
स्कूल की पढ़ाई से अभी अभी बाहर निकल कर,
फिर शुरू अब कर दिया,
प्रतियोगिता का ये नया सफर।
उम्र के 21 साल तो गुजरे थे यूं मौज में,
इंतहा अब शुरू हुआ है जिंदगी के खोज में।
बड़ा विषय, बड़े कोर्स, बड़ी-बड़ी चाहतें,
शून्य रह गए सब प्रतियोगिता में तय है,
प्रतियोगिता से प्रेम में तो,
दो ही बात तय होना है।
कर सके तो जी लगाकर,
तभी मिलेगी सफलता,
अन्यथा तू छोड़ दे अन्यथा तू छोड़ दे।
अन्यथा तू छोड़ दे , अन्यथा तू छोड़ दे।
 
2 घंटे पहले
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Ankit Kumar

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