खाकी
यह खाकी नहीं दिल का अरमान है,
यह खाकी है वीरों का एक जहान है।
वदन पर होती है खाकी तो जंचती है
यह खाकी इंसान का धर्म और ईमान है।।
खाकी में ढलकर जब कोई बढ़ता है,
कमजोरी को इससे ताकत मिलती है
और दुष्टों का सीना फिर धड़कता है।
इस कर्तव्य पथ पर जब कोई चलता है।।
कर्तव्य के पथ पर जब कोई चलता है,
उसका जीवन अलग छवि में निखरता है।
यह एक परिधान नहीं एक जिम्मेदारी है
यह जीवन के प्रति एक ईमानदारी है।।
खाकी जिसने भी जीवन में कभी पहनी है,
उसके जीवन की सबसे अलग कहानी है।
मृत्यु भी सहज आलिंगन कर ले क्या पता,
स्व जीवन से ऊपर कुछ करने की निशानी है।।
वीरों पर फबता है यह रंग शौर्य की निशानी है,
कर्मण्येवाधिकारस्ते के मूल मंत्र की कहानी है।
इसके पवित्र धागे में कितने दुःख दर्द छुपे होते,
इसके कारनामों के हर किस्से अक्सर जुदा होते।।
हर क़दम पर पर एक खतरा मंडराया होता,
कितने जीवन को इसने अनायास बचाया होगा।
बस यही इसके अहसासों की एक निशानी है
जहां बनती हर रोज एक नयी इसकी कहानी है।।
किसी को इसने डूबने से दौड़ का बचाया होगा,
किन्हीं जाते हुए प्राणों को तन में लौटाया होगा।
नहीं अहसान किया अपना फर्ज निभाया होगा
इस वर्दी का मान पहनने वाले ने बढाया होगा।।
हर जनजागृति इसके कारण ही अक्सर होती है,
दुनिया इसके कारण ही सुरक्षित अक्सर होती है।
अगर न हो वर्दी तो क्या हम सुरक्षित रह पायेंगे
छुपे हुए दरिंदे कब हमको चुपके से खा जायेंगे।।
यही वर्दी तो हमें सुरक्षा का अहसास दिलाती है,
इसके कारण ही इंसानियत सुख से रह पाती है।
रोज मरती इंसानियत इसके द्वारा बचाई जाती है,
इसीलिए यह वर्दी धरती का भगवान कहलाती है।।
जयहिंद जय भारत वंदेमातरम
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय