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Chandra Makanday

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            खिलता है खेल हर रोज शतरंज की तरह,
        
                                                    
                            
जिंदगी में हर रोज शह और मात की तरह।
घटता रहता है घटना चक्र अखवार की तरह,
घट जाती है घटनाएं कल्पनाओं की तरह।।
21 घंटे पहले
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