खिलता है खेल हर रोज शतरंज की तरह,
जिंदगी में हर रोज शह और मात की तरह।
घटता रहता है घटना चक्र अखवार की तरह,
घट जाती है घटनाएं कल्पनाओं की तरह।।
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