विषय अनुभव की गठरी
अनुभव की गठरी लिए मैं चलता जाता हूं,
थोड़ा थोड़ा मैं अनुभव विखराता जाता हूं।
कोई लेना चाहे अनुभव मेरा मैं कैसे मना करूं,
मैं तो पथिक जीवन का यादें ताजा करता जाता हूं।।
कुछ फूल खिले जीवन में मेरे मैंने उनकी खुशबू बिखराई है,
अपने जीवन के अनुभव की एक बड़ी सी गठरी बनाई है।
कुछ यादों के फूल कविता में रचकर बिखराता जाता हूं,
अपने जीवन को सबकी यादों में मैं अब समाता जाता हूं।।
यही तो जीवन की यादें एक नजीर बन जाती हैं,
हर अनुभव के पीछे एक कहानी नजर यहां आती है।
कुछ हैं खट्टी मीठी यादें कुछ कहानी कड़वी है,
जीवन के इस उपवन में अनुभव की गठरी है।।
बचपन से लेकर अधेड़ावस्था तक जो मैंने देखा है,
अपने पराये के सम्बंधों के बीच कैसी ये रेखा है।
जीवन में जैसे अनुभव हुए उन्हें मैंने समेटा है।
अपने अनुभव से शिक्षा ले नव पीढ़ी को बाटा है।।
-चन्द्र शेखर मार्कंडेय