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बदगुमां दिल है तो कोई दवा नहीं

BRAJESH KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बदगुमां दिल है तो कोई दवा नहीं
        
                                                    
                            
नापाक दिल अगर है तो कोई दुआ नहीं
किस मुंह से ले रहे हो बेवफ़ा का नाम
न खुद में हो वफ़ा तो कोई बेवफ़ा नहीं
जो आया है जहां में उसे भी जीने दो
ज़िन्दगी एक नेमत है यह कोई सज़ा नहीं
जो बात दिल में हो ज़ुबान वही
बयां करे
इससे बेहतर किसी की कोई अदा नहीं
बेखुदी के आलम में अहसास दफन हो जाते
फिर ज़िन्दगी का वजूद कैसा कोई क़ज़ा नहीं
चांद सूरज ज़मीं के बासिंदा हैं सभी "वफ़ा"
हम सभी एक ही जैसे हैं कोई जुदा नहीं
3 घंटे पहले
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