बदगुमां दिल है तो कोई दवा नहीं
नापाक दिल अगर है तो कोई दुआ नहीं
किस मुंह से ले रहे हो बेवफ़ा का नाम
न खुद में हो वफ़ा तो कोई बेवफ़ा नहीं
जो आया है जहां में उसे भी जीने दो
ज़िन्दगी एक नेमत है यह कोई सज़ा नहीं
जो बात दिल में हो ज़ुबान वही
बयां करे
इससे बेहतर किसी की कोई अदा नहीं
बेखुदी के आलम में अहसास दफन हो जाते
फिर ज़िन्दगी का वजूद कैसा कोई क़ज़ा नहीं
चांद सूरज ज़मीं के बासिंदा हैं सभी "वफ़ा"
हम सभी एक ही जैसे हैं कोई जुदा नहीं
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