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अवसर देती है पल्लवित और पुष्पित होने का।

brahmanand gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            वह उनका माथा चूमकर,
        
                                                    
                            
हो गया आश्वस्त।
उसने बचा लिया,
अपनी आकांक्षाओं को,
अपनी आशाओं को,
दुनिया के दर से,
दुनिया की बुरी नजर से ।

वह चाहता था कि,
उसकी अपनी आशा
बड़ी होकर प्राथमिक स्कूल की शिक्षक बने।
गरीबों के घर के अंधेरे को दूर कर सके।
उसकी आकांक्षा बड़ी होकर,
नर्स बने जिससे दुखी मानव को,
राहत की सांस दे सके।

वह अपनी बेटियों पर गौरवान्वित था।
इसकी कलियां खिलकर फूल बन गई,
एक शिक्षा की बगिया में,
जो तालीम से वंचित नवांकुरों को,
अवसर देती है पल्लवित और पुष्पित होने का।
दूसरी स्वास्थ्य के उपवन में।
दर्द में कराहते मनुष्य के पास
ममता का हाथ रखे,
बीमारी से लड़ते जीवन को
राहत की साँस दे।
जीवन के रंगों और खुशबू को,
महसूस करने का मौका देती है।
-ब्रह्मानंद
 
एक घंटा पहले
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