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रात के भय में जागता हुआ

binoy mb

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रात की उस निशाचरी से भयभीत,
        
                                                    
                            
नींद को त्यागकर
मैं जागता पड़ा हूँ।

मूर्खता!
जिस रात से डरता हूँ,
वही तो
मेरी पलकों पर
नींद बनकर उतरना चाहती है।
2 महीने पहले
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