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रात के भय में जागता हुआ

                
                                                         
                            रात की उस निशाचरी से भयभीत,
                                                                 
                            
नींद को त्यागकर
मैं जागता पड़ा हूँ।

मूर्खता!
जिस रात से डरता हूँ,
वही तो
मेरी पलकों पर
नींद बनकर उतरना चाहती है।
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15 घंटे पहले

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