दुख - सुख मानव जीवन के अंग हैं
अंग-अंग में बसा है दुख की धारा -
रोक सको - तो रोक लो दुख का किनारा -
सृष्टि के हर-कण-कण में मानव जीवन का दुख न्यारा -
सृष्टि में जब मानव का जन्म हुआ है
तो जुटा है दुख न्यारा -
ये दुनिया ये दौलत कोई नहीं
दुख का सुख का सहारा -।
जो सह गया दुख को हँस के सारा -
वही पा गया जीवन का असली किनारा -।