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जब छोड़ चलूँ इस दुनिया को,

Bhuneshwar Anant

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब छोड़ चलूँ इस दुनिया को,
        
                                                    
                            
तो मैं हँसता-खेलता परिवार देखूँ।
गाँव हँसता रहे, देश खुशहाल रहे,
मेरे गाँव का डंका हर जगह बजता रहे॥

मौत तो सबको आनी है, दोस्त,
तो फिर क्यों ग़मज़दा रहें?
अपनों से लड़कर, अपनों से ही,
क्यों खफ़ा-ख़फ़ा रहें?

दौलत किसके लिए कमाएँ,
हाथ की लकीरों में न हो, तो वो उड़ाएं ।
अंगभर बस्तर, पेटभर खाना,
इसी में ज़िनगी बिताएँ॥

जाते-जाते सत्कर्म कर जाएँ,
दौलत नहीं, शिक्षा दे जाएँ।
तुमसे ज़्यादा दौलत वो कमाएँ,
सब मिट जाए, पर नाम न मिट पाए॥

साठ-सत्तर की हमारी उमर,
फिर क्यों लगे हमें पहार?
जिनगी बिताले हँसकर
न रो, माया में फँसकर॥

भज ले ईश्वर सुबह-शाम,
बन जाएँ बिगड़े काम।
न देख तू दाम दाम,
भज ले तू राम राम॥
- भुनेश्वर अनंत 
18 घंटे पहले
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