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स्त्री की शोध

Bharti Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            एक पुरुष को सदियाँ लगेंगी
        
                                                    
                            
स्त्री को अपने जितना आज़ाद समझने में।
भाषा की व्याख्या करने वालों ने, व्याकरण रचयिताओं ने,
जब-जब हर उस नाज़ुक और कोमल चीज़ को देखा,
उसे स्त्रीलिंग कहा,
और कठोर चीज़ों को पुल्लिंग।
फिर भी हमेशा पुरुष का मुकाबला रहा एक स्त्री से।
इस मुकाबले की दौड़ में स्त्री ने बहुत कुछ ढूँढ लिया है,
जितना कि एक पुरुष को सदियाँ लगेंगी ढूँढने में,
लेकिन स्त्री की शोध आज तक भी जारी है।
उसने ढूँढा है एक रोते हुए बच्चे में उसकी भूख,
उसने ढूँढा है चिल्लाते हुए पुरुष में उसकी शांति।
शारीरिक तौर से ग्रस्त स्त्री ने
कभी नहीं जताई अपनी पीड़ा, और वह करती रही काम
पुरुष की तरह।
पुरुष के काम में मिल जाती हैं छुट्टियाँ कभी-कभी,
स्त्री के जीवन में
कभी-कभी भी छुट्टियाँ नहीं मिलतीं। एक स्त्री ने ढूँढा है
घर में पड़े आलू और प्याज़ से
कैसे पूरे घर का पेट भरना है।
फिर भी स्त्री आज तक तलाश में है,
और वह अब भी ढूँढ रही है।
विद्यावाचस्पति पूरी कर चुका हूँ
अपनी शोध को,
लेकिन स्त्री की शोध आज तक जारी है।
उसने बहुत कुछ खोज लिया है,
और अब भी वह कुछ ढूँढ रही है।
न जाने स्त्री की यह खोज कब खत्म होगी,
कब एक पुरुष
स्त्री को अपने जितना आज़ाद समझेगा।
5 महीने पहले
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