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यादों का विस्मरण

Bhagwat Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            यादो को संजो कर मत रखिए बहुत सालेगी
        
                                                    
                            
यादें का विस्मरण कर आगे बढ़ना समझदारी है
वरना ये यादें झकझोर देती हैं बनती भारी है
कुछ मीठी यादें आप को गुदगुदायेंगी जरुर
कड़वी और कैसेली यादों का पुलिन्दा
कुछ झकझोर देती हैं और कुछ रुला देतीं हैं
कुछ तो तन्हाई की गुजारिश कर देतीं हैं
इस खट्टी-मीठी यादों को पुलिन्दा बांध दीजिए
वरना यादें झकझोर देती हैं बनती भारी हैं
क्यों न आगे बढ़ें विस्मरण कर इन यादों को
यादों से विमुक्त होकर आगे
ज़िन्दगी को बनाने खुशहाल बनाईये
- भागवत प्रसाद
7 महीने पहले
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