यादो को संजो कर मत रखिए बहुत सालेगी
यादें का विस्मरण कर आगे बढ़ना समझदारी है
वरना ये यादें झकझोर देती हैं बनती भारी है
कुछ मीठी यादें आप को गुदगुदायेंगी जरुर
कड़वी और कैसेली यादों का पुलिन्दा
कुछ झकझोर देती हैं और कुछ रुला देतीं हैं
कुछ तो तन्हाई की गुजारिश कर देतीं हैं
इस खट्टी-मीठी यादों को पुलिन्दा बांध दीजिए
वरना यादें झकझोर देती हैं बनती भारी हैं
क्यों न आगे बढ़ें विस्मरण कर इन यादों को
यादों से विमुक्त होकर आगे
ज़िन्दगी को बनाने खुशहाल बनाईये
- भागवत प्रसाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X