आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

यादों का विस्मरण

                
                                                         
                            यादो को संजो कर मत रखिए बहुत सालेगी
                                                                 
                            
यादें का विस्मरण कर आगे बढ़ना समझदारी है
वरना ये यादें झकझोर देती हैं बनती भारी है
कुछ मीठी यादें आप को गुदगुदायेंगी जरुर
कड़वी और कैसेली यादों का पुलिन्दा
कुछ झकझोर देती हैं और कुछ रुला देतीं हैं
कुछ तो तन्हाई की गुजारिश कर देतीं हैं
इस खट्टी-मीठी यादों को पुलिन्दा बांध दीजिए
वरना यादें झकझोर देती हैं बनती भारी हैं
क्यों न आगे बढ़ें विस्मरण कर इन यादों को
यादों से विमुक्त होकर आगे
ज़िन्दगी को बनाने खुशहाल बनाईये
- भागवत प्रसाद
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
7 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर