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ऑधी चली

Bhagwat Prasad

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            इस समय फैंशन की आंधी चली है
        
                                                    
                            
हवा नहीं
उघडता बदन दिखाओ तन
अश्लीलता की पराकाष्ठा पर है
अब हम कहां जा रहे हैं
सभ्यता की ओर कि अतीत में
जब कोई बंधन नहीं था
बंधनमुक्त अतीत की ओर
तन में वस्त्र नहीं और यौन मुक्त समाज की ओर
क्या समाज, सरकार कोई तो दखल देगी
न माता-पिता का लिहाज
किसी को लाज
किस मुकाम हम आ गये हैं
कहीं तो विराम लगनी चाहिए
अश्लीलता हवा नहीं
आंधी चली है
- भागवत प्रसाद नायक
9 महीने पहले
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