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जन्म और मरण—दोनों जीवन के उत्सव हैं

BARUN KUMAR

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जन्म और मरण—दोनों
        
                                                    
                            
जीवन के उत्सव हैं,
एक भाग्य का विधान,
दूजा कर्मों का दर्पण है।

जन्म का उल्लास
नियति की देन होता है,
मरण का सम्मान
त्याग और सत्य का चयन होता है।

सफलता भाग्य के आँगन
में पुष्प खिलाती है,
असफलता संघर्ष की
अमर गाथा लिख जाती है।

जीत पर संसार
जयघोष करता है,
हार में अक्सर चरित्र
का इतिहास बोलता है।

जब विजय से अधिक
पराजय के चर्चे होने लगें,
जब त्याग भुलाकर
लोग विफलता गिनने लगें,।

जब समर्पण मौन रहे
और उपेक्षा सम्मान पाए,
तो समझना—नियति
ने न्याय नहीं किया,
समय ने अभी तुम्हारे
सत्य को पहचाना नहीं।

क्योंकि हर हार
पराजय नहीं होती,
हर जीत विजय की
सच्ची गवाही नहीं होती।

भाग्य क्षणिक गौरव का
श्रृंगार हो सकता है,
पर त्याग, सत्य और कर्म ही
जीवन का वास्तविक अलंकार है।
एक घंटा पहले
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