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करती हवा सरगोशियाँ

Avinash Beohar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            करती हवा सरगोशियाँ।
        
                                                    
                            
हैं बज रहीं खामोशियांँ।।
मधुमास में है बाग को,
ज्यों छा रहीं मदहोशियांँ।
-अविनाश ब्यौहार
 
18 घंटे पहले
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