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सच्चाई को परख लिया जब

Avinash Beohar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            छल फरेब बो गई अदालत।
        
                                                    
                            
इक धोखा हो गई अदालत।।

जब-जब खतरा मंडराया है,
कुर्सी पर सो गई अदालत।

फटे चीथड़े पहने घूमे,
बच्ची सा रो गई अदालत।

पैसों की माया देखी तो,
सपनों में खो गई अदालत।

सच्चाई को परख लिया जब,
पल भर में लो गई अदालत।
-अविनाश ब्यौहार
 
2 घंटे पहले
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