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ए मेरे दोस्त यही है जिंदगानी..

Atul Rana

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            शरारतों से भरा बचपन
        
                                                    
                            
उम्मीदों मैं डूबी जवानी.. ए मेरे दोस्त यही है जिंदगानी...
क्यों नजारा देख कर अब तू घबरा गया
हौसला जो तुझ में था वो अब कहा गया
गिर-उठ-चल बड़ा कदम
दिखा हौसला ए जवानी..
ए मेरे दोस्त यही है जिंदगानी...
नज़र मिला मंजिल से जो देख के ख़ुद को इतराती है
तोड़ दे वो सारी बंदिश जिन से तू अब आती है
छूट गया उसे छोर दे
आगे रहा आने वाली है सुहानी....
ऐ मेरे दोस्त यही है जिंदगानी...
कर गुजर कुछ ऐसा अब तू चिल्ला उठे सारा जहां
रक्त से ही अपने तू चल उठ कर अपनी रहा बना
खींच ले तू खुद लकीरें अपने ही उस भाग्य की
जो दुहाई दे रहा था तेरे पिछले पाप की
आग को तू राख कर सुना हौसले की कहानी..
ए मेरे दोस्त यही है जिंदगानी यही है जिंदगानी..
3 वर्ष पहले
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